क्राइम रिपोर्टर, सचिन सिंह चौहान,आगरा
आगरा। खासपुर दयालबाग क्षेत्र में एक संदिग्ध व्यक्ति द्वारा आयुर्वेदिक दवा के बहाने घर में घुसकर ठगी या संभावित लूट की कोशिश का मामला सामने आया है। पीड़िता की सजगता के चलते चार बार जाल बिछाने के बावजूद आरोपी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सका।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
करीब पांच दिन पहले एक बुजुर्ग महिला अपने घर के गेट पर बैठी थीं। इसी दौरान एक व्यक्ति, जो आसपास की बातचीत सुन रहा था, बीच में दखल देते हुए खुद को आयुर्वेदिक दवाओं का जानकार बताने लगा। उसने हाथ-पैर दर्द, पित्त की पथरी और अन्य बीमारियों के लिए “निशुल्क” दवा देने का दावा किया।
उसने पहले बैठने के लिए कुर्सी मांगी। फिर जड़ी-बूटी, लकड़ी की छाल और दातून जैसी सामग्री दिखाकर कहा कि दवा बनाने के लिए घर से 2 किलो चीनी और घी देना होगा। साथ ही एक विशेष जड़ी-बूटी मंगवाने के लिए पड़ोस से किसी को भेजने या उसे पैसे देने का दबाव बनाया।
महिला ने सूझबूझ दिखाते हुए न तो किसी को बाहर भेजा, न पैसे दिए, न ही उसकी दिखाई ब्राउन रंग की पिसी “विशेष चीनी” को चखा। आरोपी ने भरोसा जीतने के लिए अपना मोबाइल गिरवी रखने की पेशकश भी की, लेकिन जैसे ही पड़ोस की एक महिला मोबाइल लेकर बाहर आई, वह मौके से फरार हो गया।
आरोपी की चार संदिग्ध चालें
घर के अंदर बुलाने की कोशिश – कुर्सी लाने के बहाने महिला को अंदर भेजना चाहता था। आशंका है कि अकेला पाकर वारदात कर सकता था।
पड़ोस से सामान मंगवाने का दबाव – घर में कौन है, कौन नहीं—यह टटोलने की कोशिश।
संदिग्ध ‘चीनी’ चखाने का प्रयास – हल्की ब्राउन पिसी सामग्री हाथ पर रखवाई, फिर खाने को कहा। संभावना है कि वह नशीला पदार्थ हो सकता था।
मोबाइल गिरवी रखने की पेशकश – भरोसा जीतने की मनोवैज्ञानिक चाल। ऐसे मामलों में चोरी का मोबाइल देकर बाद में फर्जी पुलिस बनकर वसूली की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
जनता के लिए सावधानी संदेश
आजकल कुछ लोग ब्रांडेड गैस चूल्हा, मिक्सी या आयुर्वेदिक दवा के नाम पर घर-घर पहुंच रहे हैं और बाजार से आधी कीमत का लालच दे रहे हैं। ऐसे में:
अनजान व्यक्ति को घर के अंदर न बुलाएं।
किसी भी अज्ञात दवा, खाद्य पदार्थ या पाउडर को हाथ न लगाएं, न चखें।
पड़ोस से सामान मंगवाने या बच्चों/महिलाओं को भेजने से बचें।
मोबाइल या कोई वस्तु गिरवी रखने की बात पर भरोसा न करें।
संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
यह घटना इस बात का संकेत है कि अपराधी अब सीधे लूट की बजाय मनोवैज्ञानिक तरीकों से भरोसा जीतकर वारदात की कोशिश कर रहे हैं। जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।




