February 5, 2023
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Holi 2022: होली के एक दिन पहले क्यों किया जाता हे होलिका दहन

 नई दिल्ली – Holi 2022: रंगों के त्योहार के तौर पर विख्यात होली का त्योहार फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है हमारे देश भारत मे अन्य त्योहारों की तरह होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है होली का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है पहले दिन होलिका दहन के रूप में और दूसरे दिन रंगोत्सव के रूप में मनाया जाता है होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होती है इतिहास मे लिखित धार्मिक कथाओं के मुताबिक होलिका दहन की बोलानी विष्णु भक्त प्रह्लाद, उसके राक्षस पिता हिरण्यकश्यप और उसकी बुआ होलिका से जुड़ी हुई है मान्यता है कि होलिका की आग बुराई को जलाने का प्रतीक है इसे छोटी होली के नाम से भी पुकारा जाता है इसके अगले दिन बुराई पर जीत के उपलक्ष्य में होली मनाई जाती है इस वर्ष होलिका दहन 17 मार्च 2022 को मनाया गयी

हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की कथा Holi 2022

हिरण्यकश्यप हिंदुस्तान का एक राजा था जो कि राक्षस की तरह था दैत्य होने के बाद भी वह स्वयं को ईश्वर से बड़ा समझता था वह चाहता था कि लोग सिर्फ उसकी पूजा-अर्चना करें कारण था जिसमें भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप के छोटे भाई को मृत्यु दंड दिया, जिसका बदला वह उनसे लेना चाहता था भगवान विष्णु से बदला लेने के लिए उसने वर्षो तक प्रार्थना की आखिरकार उसे वरदान मिला, लेकिन इससे हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान समझने लगा और लोगों से स्वयं की भगवान की तरह पूजा करने को कहने लगा

Holi 2022 इस दुष्ट राजा का एक बेटा हुआ, जिसे हम प्रह्लाद के नाम से जानते हैं, जो कि भगवान विष्णु का परम भक्त था प्रह्लाद को भक्ति अपनी मां से विरासत के रूप में मिली थी हिरणकश्यप को भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करना पसंद नहीं था । लेकिन प्रह्लाद ने अपने पिता का कहना कभी नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा बेटे द्वारा अपनी पूजा न करने से नाराज उस राजा ने अपने बेटे को मारने का फैसला किया उसे मारने के लिए हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन की सहायता ली उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकती होलिका आग में जल नहीं सकती थी उनकी योजना प्रह्लाद को जलाने की थी, लेकिन उनकी यह योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रह्लाद सारा समय भगवान विष्णु का नाम लेता रहा और बच गया पर होलिका जलकर राख हो गई

Holi 2022: होली की ये हार बुराई के नष्ट होने का प्रतीक है इसके बाद भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया इसलिए होली का त्योहार, होलिका की मृत्यु की बोलानी से जुड़ा हुआ है इसके चलते हिंदुस्तान के कुछ प्रदेशों में होली से एक दिन पहले बुराई के अंत के प्रतीक के तौर पर होलिका का पुतला चौराहों पर रखा जाता है और उसे जलाया जाता है

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