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MYBharat Impact: अखबार बेचते-बेचते पढ़ना शुरू किया… फिर एक गांव का युवा लाखों युवाओं तक अवसर पहुंचाने निकल पड़ा

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MY Bharat से मिली दिशा, योजनाओं से जुड़कर बदली राह; अब मिशन—‘कोई युवा पीछे न छूटे’

बागपत, 21 मई। हर दिन की शुरुआत लगभग एक जैसी होती थी—साइकिल उठाना, अखबारों की गड्डी बांधना और गांव-गांव जाकर लोगों तक खबरें पहुंचाना। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही सिलसिला एक दिन एक ऐसे सफर में बदल जाएगा, जहां एक ग्रामीण युवा केवल अपनी जिंदगी नहीं बदलेगा बल्कि लाखों युवाओं तक अवसर पहुंचाने का माध्यम बनने की कोशिश करेगा। बागपत के अमन कुमार की कहानी इसी बदलाव की कहानी है—जहां केंद्र में केवल संघर्ष नहीं, बल्कि सूचना तक पहुंच, सरकारी अवसरों से जुड़ाव, युवा भागीदारी और फिर समाज को वापस देने का भाव दिखाई देता है।

अमन बताते हैं कि अखबार बेचना शुरुआत में मजबूरी थी, लेकिन धीरे-धीरे अखबार पढ़ना आदत बन गया। खबरों के बीच छपी योजनाएं, आवेदन, प्रतियोगिताएं, अवसर और युवाओं से जुड़े कार्यक्रम ध्यान खींचने लगे। पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि गांव और शहर के युवाओं के बीच कई बार सबसे बड़ा अंतर क्षमता का नहीं, जानकारी तक पहुंच का होता है।

इसी दौरान सरकारी और सामाजिक मंचों से जुड़ने की शुरुआत हुई। लेकिन जिस मंच ने इस यात्रा को दिशा दी, वह युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय का MY Bharat रहा। अमन के अनुसार, यहां पहली बार उन्हें यह महसूस हुआ कि युवा केवल योजनाओं का लाभ लेने वाला वर्ग नहीं, बल्कि बदलाव और नेतृत्व का भागीदार भी बन सकता है। इसी दौरान डिप्टी डायरेक्टर अरुण तिवारी ने उनकी योग्यता और प्रयासों को पहचानकर आगे आने का अवसर दिया। यह अवसर सोच में बदलाव लेकर आया।

इसके बाद अमन के सामने सवाल यह नहीं रहा कि वे खुद आगे कैसे बढ़ें। सवाल बदलकर यह हो गया कि जिन अवसरों ने उनकी दिशा बदली, वे दूसरे युवाओं तक कैसे पहुंचें। इसी सोच के साथ उन्होंने प्रोजेक्ट कॉन्टेस्ट 360 के माध्यम से युवाओं को शिक्षा, करियर, प्रतियोगिताओं, नेतृत्व कार्यक्रमों और विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ने का प्रयास शुरू किया। समय के साथ यह पहल देशभर के लगभग 84 लाख युवाओं तक अवसरों की जानकारी पहुंचाने का माध्यम बनी। अमन मानते हैं कि देश में कई युवा संसाधनों से पहले जानकारी के अभाव के कारण पीछे रह जाते हैं और अगर सही समय पर सही सूचना मिल जाए तो बहुत कुछ बदल सकता है।

यह सोच केवल डिजिटल स्तर तक सीमित नहीं रही। बागपत प्रशासन के साथ स्वैच्छिक रूप से जुड़कर अमन ने स्थानीय स्तर पर भी तकनीकी समाधानों में योगदान दिया। कांवड़ यात्रा एप, स्वीप बागपत एप और सूचना सेतु एप जैसे प्रयासों में उनकी भूमिका रही। इन पहलों का उद्देश्य सूचना को अधिक सरल, तेज और नागरिकों तक उपयोगी रूप में पहुंचाना था। उनका मानना है कि जब प्रशासन और युवा साथ मिलकर काम करते हैं तो योजनाओं का असर जमीन तक दिखाई देता है।

इसी सफर ने उन्हें हाल ही में नई दिल्ली तक पहुंचाया, जहां विशेष आमंत्रण पर केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से संवाद का अवसर मिला। अमन ने वहाँ गांव, जनपद और प्रदेशभर के हजारों युवाओं से विकसित भारत निर्माण संबंधी विषयों पर चर्चा और चिंतन के आधार पर तैयार किए गए 40 सुझावों का संकलन मंत्री के समक्ष रखा। डॉ. मांडविया ने इन सुझावों की सराहना की और विकसित भारत के लिए युवाओं को पंच प्रण के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। इस दौरान अमन ने बागपत के युवाओं के लिए एक विशेष ऑटोग्राफ भी प्राप्त किया।

इस यात्रा के दौरान उन्हें कई मंचों पर सम्मान भी मिला। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें सर्वोच्च युवा सम्मान स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड से सम्मानित किया। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में उन्होंने उत्तर प्रदेश के ग्रुप कैप्टन के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के समक्ष प्रदेश के युवाओं का नेतृत्व किया। वर्ष 2025 में उन्हें स्वयंसेवा क्षेत्र का राष्ट्रीय आई वॉलंटियर यूथ चैंपियन पुरस्कार मिला, जो देशभर से केवल एक युवा को प्रदान किया जाता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी उन्हें 75 जिलों के युवाओं के बीच यूथ आइकॉन के रूप में सम्मानित किया गया। उनकी यात्रा को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी द्वारा भी सम्मान मिला।

पिछले पांच वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय अमन, MY Bharat से सम्बद्ध उड़ान यूथ क्लब के अध्यक्ष भी हैं। राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ वे यूनेस्को, हंड्रेड सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों से जुड़कर कार्य कर रहे हैं। नई दिल्ली से लौटने के बाद उन्होंने जिलाधिकारी अस्मिता लाल और जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी के साथ अपने अनुभव साझा किए और युवाओं तक अवसर पहुंचाने में प्रशासन की भूमिका के लिए आभार भी व्यक्त किया।

लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शायद सम्मान, मंच या उपलब्धियां नहीं हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस युवा ने कभी घर-घर जाकर लोगों तक खबरें पहुंचाईं, उसने उन्हीं खबरों और अवसरों में अपना रास्ता खोजा और अब वही कोशिश कर रहा है कि किसी गांव का कोई युवा केवल इसलिए पीछे न रह जाए क्योंकि उसे समय पर जानकारी नहीं मिली।

एक छोटे से गांव से शुरू हुई यह यात्रा आज एक विचार बन चुकी है—अगर अवसर और जानकारी गांव तक पहुंच जाए, तो गांव का युवा केवल भागीदारी नहीं करता, नेतृत्व भी करता है। और शायद इसी सोच ने अमन कुमार के काम को एक मिशन में बदल दिया है— “कोई युवा पीछे न छूटे।”

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Author: Baghpat

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