विशेष लेख: समाज के अदृश्य गड्ढों में खोती एक पीढ़ी

किस्मत, बिगड़ैल, नालायक और मजबूरी जैसे शब्द अक्सर उन सामाजिक कारणों को छिपा देते हैं, जिनकी वजह से लाखों युवा चुपचाप पीछे छूट जाते हैं। सवाल यह नहीं कि कौन गिरा, सवाल यह है कि समाज ने वह गड्ढा अब तक भरा क्यों नहीं। सड़क पर बने गड्ढे की एक अच्छी बात होती है। वह … Read more

गांव से दिखता भारत: एक साइकिल, कुछ अख़बार और एक सवाल

लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 05 फरवरी 2026 सुबह के चार बजे हैं। उत्तर भारत की सर्द हवा अब भी तीखी है। एक किशोर साइकिल पर अख़बारों का गठ्ठर बाँधे कच्ची सड़क पर निकल पड़ता है। कुछ घंटों में उसे स्कूल पहुँचना है, लेकिन उससे पहले गांव-गांव अख़बार बाँटना ज़रूरी है। यह दृश्य उत्तर प्रदेश के … Read more