विशेष लेख: समाज के अदृश्य गड्ढों में खोती एक पीढ़ी

किस्मत, बिगड़ैल, नालायक और मजबूरी जैसे शब्द अक्सर उन सामाजिक कारणों को छिपा देते हैं, जिनकी वजह से लाखों युवा चुपचाप पीछे छूट जाते हैं। सवाल यह नहीं कि कौन गिरा, सवाल यह है कि समाज ने वह गड्ढा अब तक भरा क्यों नहीं। सड़क पर बने गड्ढे की एक अच्छी बात होती है। वह … Read more

करुणा के बिना अधूरी है विकास की परिभाषा: अमन कुमार

आज जब हम चाँद और मंगल तक पहुँचने की बात कर रहे हैं, तब ‘विकास’ सबसे ज़्यादा बोला जाने वाला शब्द बन गया है। सरकार की नीतियों से लेकर टीवी पर बहस और चुनावी नारों से लेकर विदेशों की बैठकों तक… हर कहीं विकास की बातें हो रही हैं लेकिन एक सवाल जो अकसर अछूता … Read more

नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी के संग दुनिया में शांति और मानवता का उजियारा बिखेरेंगे अमन

बागपत दिनांक 24 मई 2025 — जब पूरी दुनिया तकनीक और प्रतिस्पर्धा की दौड़ में आगे बढ़ रही है, तब भारत का एक युवा शांतिपूर्वक कहता है – “अब समय है करुणा से नेतृत्व करने का।” ये आवाज़ है बागपत, उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव ट्योढ़ी से निकले अमन कुमार की, जिनका चयन नोबेल … Read more